मज़ाक मज़ाक में

यूं ही ज़िंदगी की बोरीयत के बीच एक solid thought आया
होठों पे smile के साथ दिल से भी एक loud shout आया

अपने मुहल्ले की पिंकी पहले से ही अपने sight में थी
उसके चक्कर में कितनी बार कटी अपनी kite भी थी

अपनी unutilized काबिलियत पे हमें doubt ना था
और ना ही अब कोई available option walkout था

सुबह उठकर facebook पे खोजा और उसे hello किया
और next दिन से पूरे week 24X7 उसे follow किया

Single status था उसका सो कोई hurdle न था
फिर भी मेरा मन एक moment भी idle न था

अब उसे propose करने का सुविचार मेरे मन में आया
पास जाते ही मैंने अपना audio driver uninstalled पाया

Full silent रहा मैं जैसे someone has just died                                                                                                                                                             चेहरा लाल पर गया like it has been deep fried

कुछ देर पहले तक मैं  अपनी picture का hero था                                                                                                                                                             अब CPU usage 100 और available memory 0 था.

next month फिर से हिम्मत जुटा के सब बोल आया
पहले तो गुस्सा हुई then response LOL आया

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कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

ये दिल न होता ये खयाल न होता

न इश्क़ होता न खोने का मलाल होता

न मौत होती न जीने का सवाल होता

बस उनका चेहरा और मेरी निगाहें

उनकी मुस्कुराहट होती और मेरी आहें

वो अपनी हसीन जुल्फों को सहलाते

हम आशिक़ी की खातिर न अपना दिल जलाते

बस उनकी यादों से ही अपना मन बहलाते

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

अब उनकी एक हसी में अपनी ज़िंदगी गुजर जाएँ

और गर नई ज़िंदगी हो तो फिर यही किरदार निभाएँ